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20 करोड़ की शर्त, खुली बहस और AK-47 का जिक्र… मोकामा की वो पुरानी अदावत फिर क्यों लौटी? अनंत सिंह और नीरज कुमार की पूरी कहानी

एक तरफ अनंत सिंह, दूसरी तरफ नीरज कुमार और बीच में 2026 का पटना स्नातक MLC चुनाव। बिहार की राजनीति में मोकामा की लड़ाई कोई नई कहानी नहीं है। लेकिन इस बार पुरानी राजनीतिक अदावत फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां बात सिर्फ चुनाव तक सीमित नहीं रह गई।

अनंत सिंह ने नीरज कुमार को खुली चुनौती दी है। इतना ही नहीं, अनंत सिंह ने 20 करोड़ रुपये की शर्त तक लगा दी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच पुरानी कहानी, पुराने आरोप और 2019 का AK-47 मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

तो आखिर अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच इतनी पुरानी अदावत है क्या?

कहानी शुरू होती है 2015 के मोकामा विधानसभा चुनाव से।

2015 में पहली बार आमने-सामने आए अनंत और नीरज

2015 के विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह और नीरज कुमार आमने-सामने आए। इसके बाद चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया। JDU ने अनंत सिंह की जगह नीरज कुमार को मोकामा से मैदान में उतारा। वहीं अनंत सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

यानी पहली बार दोनों नेता सीधे चुनावी मैदान में आमने-सामने थे। नतीजा आया तो अनंत सिंह ने नीरज कुमार को 18,348 वोटों से हरा दिया। अनंत सिंह को 54,005 वोट मिले, जबकि नीरज कुमार को 35,657 वोट मिले।

लेकिन चुनाव खत्म होने के साथ दोनों के बीच की राजनीतिक दूरी खत्म नहीं हुई। बल्कि यहीं से दोनों के बीच टकराव की कहानी और तेज होती चली गई।

चुनाव के बाद भी जारी रहा टकराव

2015 के बाद दोनों नेताओं की राजनीतिक राह अलग-अलग रही। लेकिन मोकामा की राजनीति में जब भी दोनों के नाम साथ आए, पुरानी खींचतान भी सामने आती रही।

अनंत सिंह का आरोप रहा कि नीरज कुमार लगातार उनका विरोध करते रहे। वहीं नीरज कुमार की ओर से भी अनंत सिंह के आरोपों को स्वीकार नहीं किया गया।

यानी दोनों तरफ से कहानी अलग-अलग है। लेकिन एक बात साफ है कि 2015 का चुनाव दोनों के रिश्ते में एक बड़ा मोड़ था।फिर आया 2019 का AK-47 मामला।

2019 का AK-47 मामला

अब इस कहानी के सबसे विवादित हिस्से पर आते हैं। अगस्त 2019 में पुलिस ने अनंत सिंह के पैतृक घर पर छापेमारी की। पुलिस ने वहां से AK-47, कारतूस और हथगोले बरामद होने का दावा किया।

इसके बाद अनंत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। उन्होंने बाद में दिल्ली की अदालत में सरेंडर किया।

अनंत सिंह लगातार कहते रहे कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है। यहीं से नीरज कुमार का नाम भी अनंत सिंह के आरोपों में सामने आने लगा।

अनंत सिंह का नीरज कुमार पर क्या आरोप है?

अनंत सिंह का आरोप है कि 2019 की कार्रवाई में उन्हें फंसाने के पीछे नीरज कुमार की भूमिका थी। अनंत सिंह ने यह तक आरोप लगाया कि उनके घर में AK-47 रखकर उन्हें फंसाया गया।

लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि यह अनंत सिंह का आरोप है। इस आरोप को साबित करने वाला कोई ऐसा न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं है, जिसके आधार पर इसे तथ्य माना जाए।

नीरज कुमार इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। उनका कहना रहा है कि जिसके पास सबूत है, उसे अदालत में पेश करना चाहिए।

AK-47 केस में क्या हुआ?

AK-47 मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया चली। विशेष अदालत ने अनंत सिंह को दोषी ठहराया था। इसके बाद उनकी विधानसभा सदस्यता भी चली गई।

इसके बाद अनंत सिंह ने पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अगस्त 2024 में हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली और वह जेल से बाहर आए।

लेकिन 2019 का यह मामला अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद की सबसे बड़ी पृष्ठभूमि बन गया।

अब 20 करोड़ की शर्त वाली बहस क्या है और क्यों हो रही है?

अब आते हैं 2026 पर। पटना स्नातक MLC चुनाव सामने है और JDU ने नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है। इसी बीच अनंत सिंह ने नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है।

अनंत सिंह ने कहा कि अगर नीरज कुमार को अपनी बात पर भरोसा है, तो दोनों आमने-सामने बैठकर बहस करें। अनंत सिंह ने इसके साथ 20 करोड़ रुपये की शर्त भी रखी। उन्होंने सार्वजनिक बहस के लिए मंदिर के पास आने की चुनौती दी। यानी पुरानी राजनीतिक लड़ाई अब खुली बहस की चुनौती तक पहुंच चुकी है।

इस बार मामला सिर्फ पुरानी दुश्मनी का नहीं

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर 2026 में यह पुरानी लड़ाई फिर क्यों सामने आई? इसका सीधा कनेक्शन पटना स्नातक MLC चुनाव से है।

अनंत सिंह ने साफ तौर पर नीरज कुमार का विरोध किया है। खास बात यह है कि अनंत सिंह ने सिर्फ विरोध नहीं किया, बल्कि नीरज कुमार के मुकाबले मैदान में मौजूद जन सुराज के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह का समर्थन भी किया है।

अनंत सिंह का कहना है कि उनका विरोध JDU से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से नीरज कुमार से है।

यानी इस पूरे विवाद में पार्टी और व्यक्तिगत विरोध के बीच की लाइन भी चर्चा में आ गई है।

JDU के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है यह विवाद?

अनंत सिंह और नीरज कुमार दोनों JDU से जुड़े हुए हैं। ऐसे में जब एक JDU नेता अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ खुलकर बोलता है, तो मामला सिर्फ दो नेताओं की लड़ाई नहीं रह जाता।

JDU के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस विवाद को लेकर प्रतिक्रिया दी है। कहा गया है कि मामला पार्टी के बड़े नेताओं के संज्ञान में है और समय आने पर समाधान किया जाएगा।

वहीं JDU की ओर से यह भी कहा गया है कि पार्टी का लक्ष्य सभी सीटों पर अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना है।

पुरानी कहानी में अब नया चुनावी अध्याय

2015 में अनंत सिंह और नीरज कुमार मोकामा में आमने-सामने थे। 2019 में AK-47 मामले ने दोनों के बीच विवाद को और गहरा किया। और अब 2026 में वही पुरानी कहानी पटना स्नातक MLC चुनाव के बीच फिर सामने है।

फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार मुकाबला मोकामा विधानसभा सीट का नहीं, बल्कि पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का है।

अनंत सिंह नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मैदान में हैं और डॉ. अनुज सिंह का समर्थन कर रहे हैं। दूसरी तरफ नीरज कुमार JDU के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में हैं।

आखिर सवाल क्या है?

तो सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच क्या होगा। बड़ा सवाल यह है कि क्या 2015 में शुरू हुई राजनीतिक लड़ाई 2026 के MLC चुनाव में नया रूप ले चुकी है?

क्या 2019 का AK-47 विवाद एक बार फिर चुनावी मुद्दा बनेगा? और क्या अनंत सिंह की खुली बहस और 20 करोड़ की शर्त वाली चुनौती का नीरज कुमार कोई जवाब देते हैं?

क्योंकि जैसे-जैसे पटना स्नातक MLC चुनाव आगे बढ़ रहा है, मोकामा की पुरानी अदावत अब पटना के चुनावी मैदान तक पहुंच चुकी है।

Khabar Point के लिए शुभम की रिपोर्ट 

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