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70वीं BPSC की पूरी कहानी: पेपर लीक विवाद, आंदोलन, कोर्ट, रिजल्ट और BIPARD ट्रेनिंग तक

पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले लाखों अभ्यर्थियों के लिए 70वीं BPSC संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा सिर्फ एक भर्ती परीक्षा नहीं रही। सितंबर 2024 में 2,035 पदों के विज्ञापन से शुरू हुई यह प्रक्रिया दिसंबर में बापू परीक्षा परिसर के विवाद, छात्रों के आंदोलन, शिक्षकों की सक्रिय भूमिका, पुलिस कार्रवाई, पेपर लीक के आरोप, PT रिजल्ट पर सवाल, कोर्ट की लड़ाई, Mains और इंटरव्यू से होते हुए जून 2026 के फाइनल रिजल्ट और अगस्त में नियुक्ति पत्र तक पहुंची।

इसके बावजूद परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर छात्रों का एक वर्ग आज भी सवाल उठा रहा है। एक तरफ 70वीं BPSC के चयनित अभ्यर्थी अब प्रशासनिक प्रशिक्षण ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पटना के गर्दनीबाग में प्रतियोगी छात्र आंदोलन जारी रखे हुए हैं। छात्रों की मांग है कि 70वीं BPSC की परीक्षा प्रक्रिया की जांच हो और परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराया जाए।

23 सितंबर 2024: 2,035 पदों के साथ शुरू हुआ सफर

70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के लिए BPSC ने 2,035 पदों का विज्ञापन जारी किया। प्रशासनिक और पुलिस सेवा समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर भर्ती होनी थी। पदों की बड़ी संख्या के कारण यह परीक्षा बिहार के प्रतियोगी छात्रों के लिए बड़ा अवसर मानी जा रही थी।

लेकिन परीक्षा से पहले ही नॉर्मलाइजेशन को लेकर छात्रों के बीच असमंजस शुरू हो गया। बाद में आयोग ने परीक्षा को एक दिन और एक शिफ्ट में कराने की व्यवस्था की। BPSC के परीक्षा कैलेंडर में 70वीं CCE की PT की तारीख 13 दिसंबर 2024 और बापू परीक्षा परिसर की पुनर्परीक्षा 4 जनवरी 2025 दर्ज है।

13 दिसंबर 2024: परीक्षा खत्म होते ही उठे सवाल

13 दिसंबर को 70वीं BPSC की प्रारंभिक परीक्षा आयोजित हुई। लेकिन पटना के बापू परीक्षा परिसर में परीक्षा के दौरान हंगामा हो गया।

अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र मिलने में देरी, परीक्षा व्यवस्था और प्रश्नपत्र की सील को लेकर सवाल उठाए। कुछ छात्र परीक्षा के बीच में ही बाहर निकल आए। इसके बाद परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोप सामने आए।

BPSC ने पूरे बिहार में पेपर लीक की बात को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने बापू परीक्षा परिसर की घटना को अलग मामला मानते हुए इसी केंद्र के अभ्यर्थियों के लिए दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया।

यहीं से छात्रों की सबसे बड़ी मांग सामने आई—सिर्फ एक सेंटर नहीं, पूरी 70वीं PT रद्द की जाए।

DM के थप्पड़ से और भड़का आक्रोश

बापू परीक्षा परिसर के बाहर स्थिति बिगड़ने के बाद तत्कालीन पटना जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह समेत प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।

चंद्रशेखर सिंह थप्पड़
चंद्रशेखर सिंह थप्पड़ मारते हुए

इसी दौरान एक छात्र को थप्पड़ मारने का वीडियो सामने आया। इस घटना ने पहले से नाराज छात्रों के बीच आक्रोश और बढ़ा दिया। परीक्षा का विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई और छात्रों के सम्मान के सवाल तक पहुंच गया।

इसके बाद पटना के गर्दनीबाग में छात्रों का धरना तेज हुआ।

गर्दनीबाग बना आंदोलन का केंद्र

दिसंबर 2024 से गर्दनीबाग धीरे-धीरे 70वीं BPSC आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया। छात्रों की मांग साफ थी कि पूरी प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराई जाए।

आंदोलन में छात्रों के साथ कई शिक्षक भी सामने आए। इनमें रोहित प्रियदर्शी सर, रामांशु मिश्रा सर और गुरु रहमान समेत अन्य शिक्षक शामिल रहे।

रोहित प्रियदर्शी सर की भूमिका इस आंदोलन में खास तौर पर चर्चा में रही। वह छात्रों के साथ धरनास्थल पर मौजूद रहे और आंदोलन को समर्थन दिया। दिसंबर में BPSC कार्यालय की ओर प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई हुई और रोहित प्रियदर्शी को गिरफ्तार भी किया गया। पुलिस ने उन पर प्रदर्शनकारियों को BPSC कार्यालय की ओर जाने के लिए उकसाने का आरोप लगाया था।

रोहित प्रियदर्शी सर
रोहित प्रियदर्शी सर

लेकिन छात्रों के बीच उनकी पहचान सिर्फ गिरफ्तार किए गए शिक्षक की नहीं रही। आंदोलनकारी छात्रों के बीच उन्हें लगातार साथ खड़े रहने वाले शिक्षकों में गिना गया।

वहीं रामांशु मिश्रा सर ने भी आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। वह छात्रों के साथ गर्दनीबाग में लगातार जमे रहे। छात्रों के मुताबिक, आंदोलन को गर्दनीबाग से लेकर पटना हाईकोर्ट और दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने में भी उन्होंने कानूनी तौर पर मदद की।

गुरु रहमान और दूसरे शिक्षकों ने भी उठाई आवाज

70वीं BPSC विवाद में गुरु रहमान समेत कई शिक्षकों ने छात्रों का समर्थन किया। शिक्षकों ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच और छात्रों की मांगों पर सरकार तथा आयोग से जवाब मांगने की बात कही।

इस दौरान आंदोलन का स्वरूप भी बदलता गया। अब यह सिर्फ अभ्यर्थियों का धरना नहीं था। शिक्षक, छात्र और अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेता भी समय-समय पर आंदोलन के समर्थन में सामने आने लगे।

25 और 29 दिसंबर: सड़क पर बढ़ा संघर्ष

25 दिसंबर को छात्रों ने BPSC कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की और स्थिति तनावपूर्ण हुई।

इसके बाद 29 दिसंबर को गांधी मैदान से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च की कोशिश हुई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोका। पानी की बौछार और पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आईं।

आंदोलन अब बिहार की राजनीति में भी बड़ा मुद्दा बन चुका था।

4 जनवरी 2025: बापू केंद्र की दोबारा परीक्षा

BPSC ने पूरे बिहार की परीक्षा रद्द करने के बजाय सिर्फ बापू परीक्षा परिसर के अभ्यर्थियों के लिए 4 जनवरी 2025 को पुनर्परीक्षा कराई।

यही निर्णय आगे एक और विवाद की वजह बना।

13 दिसंबर को परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी और 4 जनवरी को परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी अलग-अलग तारीखों पर परीक्षा दे चुके थे। अब छात्रों की नजर परिणाम पर थी।

सवाल था—क्या दोनों परीक्षाओं के परिणाम में कोई बड़ा अंतर दिखाई देगा?

23 जनवरी: PT रिजल्ट आया और फिर शुरू हुआ नया विवाद

23 जनवरी 2025 को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हुआ।

इसके बाद छात्रों के एक वर्ग ने दावा किया कि 4 जनवरी की पुनर्परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों का अनुपात 13 दिसंबर की परीक्षा से अधिक रहा।

अब विवाद पेपर लीक के आरोप से आगे बढ़कर परिणाम, मूल्यांकन और दोनों परीक्षाओं के बीच समानता के सवाल तक पहुंच गया।

आयोग ने अपनी परीक्षा प्रक्रिया का बचाव किया, लेकिन छात्रों का आंदोलन जारी रहा।

मामला पटना हाईकोर्ट पहुंचा

70वीं BPSC PT को रद्द कर पूरे बिहार में दोबारा परीक्षा कराने की मांग पटना हाईकोर्ट पहुंची।

28 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने पूरी प्रारंभिक परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने बापू परीक्षा परिसर की घटना को पूरे राज्य की परीक्षा रद्द करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना। साथ ही भविष्य की परीक्षाओं की सुरक्षा, SOP और शिकायत निवारण व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पर सुझाव दिए।

यानी अदालत से छात्रों की मुख्य मांग पूरी नहीं हुई।

लेकिन आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

अप्रैल 2025: Mains की बारी

आयोग ने आगे की प्रक्रिया जारी रखी और अप्रैल 2025 में 70वीं BPSC की मुख्य परीक्षा आयोजित की गई।

BPSC के रिकॉर्ड के मुताबिक Mains 25, 26, 28, 29 और 30 अप्रैल को आयोजित हुई। इसमें 20,034 अभ्यर्थी शामिल हुए।

अब आंदोलन का एक हिस्सा PT की कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग करता रहा, जबकि चयन प्रक्रिया आगे बढ़ती रही।

दिसंबर 2025: Mains का रिजल्ट

16 दिसंबर 2025 को Mains का रिजल्ट जारी हुआ और 5,401 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए सफल घोषित किए गए।

अब अंतिम चयन की दौड़ शुरू हो चुकी थी। इसके बाद इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी हुई और हजारों अभ्यर्थियों की नजर फाइनल रिजल्ट पर टिक गई।

20 जून 2026: फाइनल रिजल्ट

आखिरकार 20 जून 2026 को 70वीं BPSC का फाइनल रिजल्ट जारी हुआ।

2,035 विज्ञापित पदों के मुकाबले 2,027 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन हुआ।

परीक्षा की शुरुआत से फाइनल रिजल्ट तक पहुंचने में करीब 21 महीने का समय लगा। कई अभ्यर्थियों के लिए यह वर्षों की मेहनत का परिणाम था, लेकिन आंदोलन कर रहे छात्रों के लिए सवाल अभी भी खत्म नहीं हुआ था।

13 अगस्त 2026: नियुक्ति पत्र बांटे गए

13 अगस्त को पटना के बापू सभागार में 70वीं BPSC से चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए।

एक तरफ चयनित अभ्यर्थियों और उनके परिवारों के लिए यह खुशी का दिन था। दूसरी तरफ आंदोलनकारी छात्रों का कहना था कि जब परीक्षा प्रक्रिया पर इतने गंभीर सवाल उठे हैं तो जांच के बिना नियुक्ति प्रक्रिया को अंतिम रूप देना उचित नहीं है।

नियुक्ति समारोह में चयनित अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा में योगदान की जिम्मेदारी भी बताई गई।

यानी एक ही परीक्षा को लेकर बिहार में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई दे रही थीं।

एक तरफ नियुक्ति पत्र लेकर मुस्कुराते युवा, दूसरी तरफ उसी परीक्षा को रद्द कराने के लिए सड़क पर बैठे छात्र।

BIPARD में शुरू हुई अफसरों की ट्रेनिंग

नियुक्ति के बाद चयनित अधिकारियों की ट्रेनिंग शुरू हुई।

अब 70वीं BPSC के सफल अभ्यर्थी प्रशासनिक सेवा की जिम्मेदारियों के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं। परीक्षा की पूरी प्रक्रिया अब नियुक्ति और प्रशिक्षण के चरण में पहुंच चुकी है।

लेकिन पटना के गर्दनीबाग में आंदोलन का एक हिस्सा अभी भी 70वीं BPSC को रद्द करने और पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग कर रहा है।

अगस्त 2026: फिर तेज हुआ 70वीं BPSC आंदोलन

अगस्त में 70वीं BPSC को रद्द कराने की मांग एक बार फिर तेज हुई।

16 अगस्त को पप्पू यादव ने भी छात्रों के समर्थन में पटना में धरना और उपवास किया। 25 अगस्त को BPSC परीक्षा नियंत्रक की एक टिप्पणी के बाद आंदोलन और चर्चा में आ गया। उस समय गर्दनीबाग में छात्र 70वीं BPSC रद्द करने समेत कई भर्ती संबंधी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।

BPSC 70th protest
पटना में BPSC 70th के अभ्यर्थी धरने पर बैठे हुए

सितंबर में भी छात्रों का आंदोलन सड़क पर दिखाई दिया। 15 सितंबर को प्रतियोगी छात्रों ने BPSC 70वीं परीक्षा और दरोगा भर्ती परीक्षा रद्द करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया और विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की।

यानी फाइनल रिजल्ट और नियुक्ति के बाद भी 70वीं BPSC का विवाद खत्म नहीं हुआ।

गर्दनीबाग में अब भी सवाल

छात्रों के अनुसार गर्दनीबाग में चल रहे मौजूदा धरने को करीब 53 दिन हो चुके हैं। हालांकि यह आंदोलन केवल 70वीं BPSC तक सीमित नहीं है। इसमें दरोगा भर्ती, शिक्षक भर्ती, BSSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी मांगें भी शामिल हैं।

लेकिन 70वीं BPSC अब भी आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल है।

छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा से जुड़े उनके सवालों की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से छात्रों की मुलाकात

इसी आंदोलन के बीच छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की।

छात्रों ने अपनी मांगों और 70वीं BPSC से जुड़े सवालों से संबंधित दस्तावेज उनके सामने रखे। उपलब्ध तस्वीर में छात्र प्रतिनिधि नीतीश कुमार को दस्तावेज सौंपते दिखाई दे रहे हैं।

छात्रों की मांग है कि 70वीं BPSC की पूरी प्रक्रिया में उठे सवालों की जांच हो और उन्हें न्याय मिले।

अब यह मामला एक नए राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ पर पहुंच गया है।

70वीं BPSC की कहानी आखिर पहुंची कहां?

सितंबर 2024 में 2,035 पदों के विज्ञापन से शुरू हुई कहानी दिसंबर 2024 में बापू परीक्षा परिसर के विवाद तक पहुंची।

फिर—

  • 13 दिसंबर 2024 — PT आयोजित हुई
  • बापू परीक्षा परिसर में हंगामा
  • पूरी परीक्षा रद्द करने की मांग
  • गर्दनीबाग में धरना
  • रोहित प्रियदर्शी समेत शिक्षकों का समर्थन
  • पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियां
  • 4 जनवरी 2025 — बापू केंद्र की पुनर्परीक्षा
  • 23 जनवरी — PT रिजल्ट
  • रिजल्ट पर फिर सवाल
  • हाईकोर्ट में मामला
  • 28 मार्च — याचिकाएं खारिज
  • अप्रैल 2025 — Mains
  • दिसंबर 2025 — Mains रिजल्ट
  • 2026 — इंटरव्यू
  • 20 जून — फाइनल रिजल्ट
  • 2,027 अभ्यर्थियों का चयन
  • 13 अगस्त — नियुक्ति पत्र
  • BIPARD में ट्रेनिंग
  • और दूसरी तरफ गर्दनीबाग में जारी आंदोलन।

यानी 70वीं BPSC की एक तरफ की कहानी नियुक्ति और ट्रेनिंग तक पहुंच चुकी है, जबकि दूसरी तरफ की कहानी अभी भी जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग के साथ सड़क पर मौजूद है।

और यही इस पूरी कहानी का सबसे बड़ा सवाल है—

क्या 70वीं BPSC पर उठे सवालों का अंतिम जवाब मिल चुका है, या गर्दनीबाग में बैठे छात्रों के सवाल अभी बाकी हैं?

एक तरफ BIPARD में नए अधिकारी प्रशासनिक जिम्मेदारियों की ट्रेनिंग ले रहे हैं…

और दूसरी तरफ पटना के गर्दनीबाग में कुछ छात्र आज भी उसी परीक्षा के जवाब तलाश रहे हैं।

70वीं BPSC का रिजल्ट भले ही आ चुका हो, नियुक्ति भी हो चुकी हो और ट्रेनिंग भी शुरू हो गई हो—लेकिन इस परीक्षा से जुड़ा विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

ख़बर प्वाइंट के लिए गुलशन की रिपोर्ट

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