Bihar

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन: पटना के गांधी मैदान में बैठे छात्रों ने क्या कहा?

पटना: मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में हुई कथित धांधली और देश में लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब देशव्यापी रूप लेता जा रहा है। लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षाविद और समाजसेवी सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर पिछले 19 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनके इस आंदोलन को अब बिहार के युवाओं और छात्रों का भी पुरजोर समर्थन मिल रहा है।

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में जब छात्रों और युवाओं से इस विषय पर बात की गई, तो देश की शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक को लेकर उनका गुस्सा साफ नजर आया।

“9 से 10 किलो वजन घटा, फिर भी सरकार चुप” – छात्रों में नाराजगी

जंतर-मंतर से आ रही मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 दिनों की निरंतर भूख हड़ताल के कारण सोनम वांगचुक का वजन करीब 9 से 10 किलोग्राम तक घट चुका है और उनकी तबीयत धीरे-धीरे बिगड़ रही है। पटना के युवाओं का कहना है कि सरकार इस संवेदनशीलता को नहीं समझ रही है। एक छात्र ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा, “जब महात्मा गांधी भूख हड़ताल पर बैठे थे, तो अंग्रेजों ने भी 8 से 9 दिनों में उनकी बात सुन ली थी। लेकिन यहाँ 19 दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है।”

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

आंदोलनकारियों और छात्रों की सबसे प्रमुख मांग देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। पटना के छात्रों का मानना है कि परीक्षा सिस्टम में शुचिता और जवाबदेही (Accountability) तय करने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।

छात्रों ने कहा, “सिर्फ नीट (NEET) ही नहीं, हाल ही में देश में बैक-टू-बैक कई परीक्षाएं लीक हुई हैं। बिहार में भी हाल ही में एडीओ (ADO) परीक्षा का पर्चा लीक हुआ, जिसे रद्द करना पड़ा। जब तक बड़े पदों पर बैठे लोग जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक सिस्टम से भ्रष्टाचार खत्म नहीं होगा और न ही मेधावी (Merit-based) छात्रों को न्याय मिलेगा।”

“गरीब बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा है खिलवाड़”

गांधी मैदान में मौजूद छात्रों ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि बिहार के कोने-कोने से माता-पिता पेट काटकर अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पटना भेजते हैं। भारी उम्मीदों के साथ बच्चे तैयारी करते हैं, लेकिन जब परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है, तो गरीब बच्चों के पास से अवसर (Opportunity) छीन लिए जाते हैं। छात्रों का आरोप है कि सरकार ने देश की शिक्षा व्यवस्था को मजाक बना दिया है और जो परीक्षाएं बड़े स्तर पर लीक नहीं हो पातीं, उनके भीतर भी आंतरिक तौर पर बड़ी धांधली चलती है।

क्या है पूरा मामला?

1. नीट (NEET-UG) परीक्षा में धांधली का विवाद: यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG के परिणाम घोषित हुए। परीक्षा में एक साथ कई छात्रों को पूरे अंक (720 में से 720) मिले, कई सेंटरों पर ग्रेस मार्क्स दिए जाने का विवाद सामने आया और बिहार-गुजरात जैसे राज्यों में पेपर लीक के पुख्ता प्रमाण मिले। इस धांधली ने देशभर के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों के भविष्य को अधर में लटका दिया।

2. विपक्षी दलों और संगठनों का प्रदर्शन: नीट परीक्षा में हुई इस भारी अनियमितता के विरोध में ‘कॉकस जनता पार्टी’ व अन्य विभिन्न छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर मोर्चा खोल रखा है। वे लगातार परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

3. सोनम वांगचुक का अनशन में शामिल होना: लद्दाख के पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाले रेमन मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक ने छात्रों की इस आवाज को मजबूती देने के लिए जंतर-मंतर पर आमरण अनशन (भूख हड़ताल) शुरू किया। उनका मानना है कि परीक्षाओं में धांधली देश के युवाओं के भविष्य और देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख पर बड़ा हमला है। यही कारण है कि वे गिरते स्वास्थ्य के बावजूद पिछले 19 दिनों से केवल पानी और नमक के सहारे अनशन पर डटे हुए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम और पटना के छात्रों के लाइव इंटरव्यू का वीडियो आप नीचे दिए गए लिंक पर देख सकते हैं: यूट्यूब वीडियो लिंक

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