शराबबंदी पर भड़के मंत्री दिलीप जायसवाल, क्या पैसे के लिए कोठे पर बैठ जाएं?
बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। एनडीए गठबंधन में शराबबंदी कानून की समीक्षा और राजस्व नुकसान की बातों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कड़ा रुख अपनाया है।
राजस्व की हानि और शराबबंदी हटाने की मांग करने वालों पर निशाना साधते हुए मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि सिर्फ पैसा कमाने के नाम पर सिद्धांतों और मानवता से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि राजस्व बढ़ाने के नाम पर क्या कोठे पर बैठ जाएंगे?
दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार में सूखा नशा (ड्रग्स) बढ़ने या महिलाओं पर अत्याचार के आंकड़े देकर शराबबंदी को गलत ठहराने की कोशिशें बेबुनियाद हैं। देश के अन्य राज्यों की तुलना में बिहार में सूखे नशे का प्रभाव बेहद कम है। शराबबंदी से न सिर्फ सार्वजनिक स्थानों पर अपराध में कमी आई है, बल्कि घरेलू हिंसा और महिलाओं पर होने वाले अत्याचार में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
मंत्री ने कहा कि संस्कार, इंसानियत और मानवता को बेचकर या शराब पिलाकर मिलने वाले पैसे से राज्य का विकास नहीं चाहिए। उन्होंने सत्ता और विपक्ष के नेताओं, एनजीओ तथा आम जनता से अपील की कि वे एकजुट होकर लोगों को शराब के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करें।
इसके अलावा, भूमि सुधार मामलों और चीनी मिलों की जमीन पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को लेकर उन्होंने बताया कि राजस्व विभाग जल्द ही सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। मोतिहारी के हनुमान चीनी मिल की जमीन पर कब्जे के प्रयास को लेकर सरकार फिर से कोर्ट का रुख करेगी और सरकारी जमीन हथियाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
