BPSC रिजल्ट में धांधली? MLA संदीप सौरभ ने दिखाए सबूत, छात्रों का हंगामा
पटना: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं मुख्य परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद विवाद गहराता जा रहा है। पालीगंज से माले विधायक संदीप सौरभ के आवास पर बड़ी संख्या में BPSC अभ्यर्थी पहुंचे और परिणाम में हुई भारी अनियमितताओं व हिंदी माध्यम के छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
हिंदी माध्यम के छात्रों के साथ भेदभाव का आरोप
विधायक संदीप सौरभ और अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि इस बार BPSC के परिणाम में हिंदी भाषी छात्रों का प्रतिशत काफी कम हुआ है।
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आमतौर पर BPSC में हिंदी माध्यम के सफल अभ्यर्थियों का प्रतिशत 50 से 60% रहता था, जो इस बार घटकर लगभग 15% ही रह गया है।
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अभ्यर्थियों का कहना है कि बिहार जैसे मुख्य हिंदी भाषी राज्य में ही हिंदी माध्यम के छात्रों की अवहेलना की जा रही है।
कॉपी जांच और नियमों में बदलाव पर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभ्यर्थियों और विधायक ने BPSC की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए:
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नोटिफिकेशन में बदलाव: आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया के बीच में ही टाई-ब्रेकर (मार्क्स समान होने पर वरीयता देने) के नियम बदल दिए गए, जो कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
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मूल्यांकन में अनियमितता: अभ्यर्थियों ने दावा किया कि कुछ अंग्रेजी माध्यम के टॉपर्स की कॉपियों में पन्ने खाली छोड़े जाने या उत्तर गलत होने के बावजूद अच्छे मार्क्स दिए गए हैं, जबकि हिंदी माध्यम के छात्रों को बेहतर कंटेंट के बावजूद कम अंक मिले।
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डिबार (Debar) करने की धमकी: सवाल उठाने या RTI से जानकारी मांगने पर अभ्यर्थियों को आयोग द्वारा परीक्षाओं से डिबार करने का डर दिखाया जा रहा है।
नियुक्ति पत्र से पहले कॉपी सार्वजनिक करने की मांग
छात्रों और विधायक ने सरकार तथा आयोग से मांग की है कि नियुक्ति पत्र बांटने से पहले सभी अभ्यर्थियों की मूल्यांकित (इवैल्यूएटेड) कॉपियां सार्वजनिक की जाएं, ताकि निष्पक्षता की जांच हो सके।
विधायक संदीप सौरभ ने चेतावनी दी है कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारियों से मिलने के बावजूद अगर सरकार इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो छात्र राज्यव्यापी आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
