पटना छात्र आंदोलन: बेऊर जेल भेजे गए 89 छात्र, CJP ने सीएम सम्राट चौधरी के खिलाफ खोला मोर्चा
पटना: देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के शांत होने के बाद अब बिहार की राजधानी पटना छात्र आक्रोश का नया केंद्र बन गई है। पटना में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया कार्रवाई के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। देर रात कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करते हुए पुलिस ने 89 छात्रों को बेऊर जेल भेज दिया है। इस कार्रवाई के विरोध में सीजेपी (CJP) और वामपंथी छात्र संगठनों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और 30 जुलाई को पूरे बिहार में चक्का जाम (बिहार बंद) का ऐलान कर दिया है।
अटेम्प्ट टू मर्डर समेत BNS की 10 से ज्यादा गंभीर धाराएं
पुलिस ने गिरफ्तार किए गए युवाओं पर नए भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत बेहद सख्त और गंभीर धाराएं लगाई हैं। पूरे बिहार में अब तक 21 से अधिक एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं और कुल आंकड़ा 500 से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई का बताया जा रहा है।
छात्रों पर दर्ज मुख्य धाराएं:
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धारा 109(1): हत्या का प्रयास (Attempt to Murder)।
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धारा 121(1) एवं 121(2): लोक सेवक (सरकारी अधिकारी/कर्मचारी) को ड्यूटी करने से रोकना और गंभीर चोट पहुंचाना।
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धारा 191(2) एवं 191(3): दंगा भड़काने और घातक हथियारों के इस्तेमाल के गंभीर प्रावधान।
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धारा 223: सरकारी आदेशों का उल्लंघन करना।
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धारा 324(4): सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना।
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धारा 61(2): आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) रचना।
परिजनों का आरोप- ‘कस्टडी में न खाना मिला, न पानी; रात 11 बजे जज के सामने पेशी’
जेल भेजे गए अधिकांश छात्रों की उम्र 18 से 22 वर्ष के बीच है, जो मुख्य रूप से पढ़ाई करने वाले युवा हैं। परिजनों और चश्मदीदों का गंभीर आरोप है कि हिरासत में लिए गए छात्रों को 25 तारीख से ही अलग-अलग थानों में घुमाया गया और उन्हें खाना-पानी तक नहीं दिया गया।
देर रात मेडिकल जांच के बाद लगभग 11 बजे छात्रों को जज के समक्ष पेश किया गया, जिसके बाद रात 1 से 2 बजे के बीच हथकड़ी लगाकर उन्हें ठसाठस बेऊर जेल में शिफ्ट कर दिया गया। भारी जनदबाव और मीडिया कवरेज के बाद पुलिस ने कुछ नाबालिगों और छात्राओं को देर रात रिहा किया।
‘पटना बनेगा अगला जंतर-मंतर’- CJP और AISA का सीधा हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर सीजेपी (CJP) ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को निशाने पर लिया है। CJP का कहना है कि एक तरफ केंद्र सरकार और बीजेपी के बड़े नेता छात्रों पर कार्रवाई न करने का आश्वासन दे रहे थे, तो दूसरी तरफ बिहार पुलिस छात्रों का भविष्य बर्बाद करने पर तुली है।
मुख्य मांगें और भावी रणनीति:
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छात्रों की तत्काल रिहाई: जेल में बंद सभी 89 छात्रों और बिहार के अन्य जिलों से हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए।
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30 जुलाई को ‘बिहार बंद’: वामपंथी छात्र संगठन आइसा (AISA) ने घोषणा की है कि जब तक गिरफ्तार छात्रों को छोड़ा नहीं जाता, आंदोलन जारी रहेगा और 30 जुलाई को पूरे राज्य में व्यापक हड़ताल की जाएगी।
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गृह विभाग पर सवाल: मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पटना पुलिस अफसरों की यह कार्रवाई अंग्रेजों के जमाने वाली दमनकारी सोच को दर्शाती है।
क्या घिरेंगे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी?
पटना में लगातार बन रहे इस माहौल से राज्य सरकार की राजनीतिक मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और अन्य दल भी अब इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरने की तैयारी में हैं। यदि समय रहते पुलिस और प्रशासन ने मामले को शांत नहीं किया, तो पटना आने वाले दिनों में देश के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों का गवाह बन सकता है।
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